https://drive.google.com/drive/folders/1spClgg6gmmS0IG20yZCDkyJO6DCBf58J?usp=sharing पुस्तक का नाम — ‘‘ महिला जागृति अभियान ’’ , यह पुस्तक १९८८-९० तक की समयावधि में लिखी गई ‘क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला’’ की एक पुस्तक है, जिसे यहाँ समझने का प्रयास किया जाना है। अध्याय ‘‘ नई शताब्दी—नारी शताब्दी ’’ को थोड़ा ज्यादा महत्ता दें। पुस्तक के लेखक — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) श्रोता वर्ग — सामान्य नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखक’’ शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला’’ के बारे में ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ ने ‘‘वन्दनीया माताजी’’ से वसन्त पंचमी १९९० को कहा था — ‘‘मेरा ज्ञान शरीर ही जिन्दा रहेगा। ज्ञान शरीर का प्रकाश जन-जन के बीच में पहुँचना ही चाहिए और आप सबसे कहियेगा — सब बच्चों से कहियेगा कि मेरे ज्ञान शरीर को मेरे ‘क्रान्तिधर्मी साहित्य’ के रूप में जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करें।’’ ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ पत्रिका का नाम — ‘‘ अखण्ड ज्योति 1984 जून ’’ , जिसका एक अध्याय ‘‘ हमारी भविष्यवाणी - सतयुग की वापसी ’’ यहाँ प्रस्तुत किया गया है। पत्रिका के लेखक — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखक’’ शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ पुस्तक का नाम — ‘‘ युग की माँग प्रतिभा परिष्कार ’’ , यह पुस्तक १९८८-९० तक की समयावधि में लिखी गई ‘क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला’’ की एक पुस्तक है, जिसे यहाँ समझने का प्रयास किया जाना है। पुस्तक के लेखक — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) श्रोता वर्ग — सामान्य नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखक’’ शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला’’ के बारे में ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ ने ‘‘वन्दनीया माताजी’’ से वसन्त पंचमी १९९० को कहा था — ‘‘मेरा ज्ञान शरीर ही जिन्दा रहेगा। ज्ञान शरीर का प्रकाश जन-जन के बीच में पहुँचना ही चाहिए और आप सबसे कहियेगा — सब बच्चों से कहियेगा कि मेरे ज्ञान शरीर को मेरे ‘क्रान्तिधर्मी साहित्य’ के रूप में जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करें।’’ ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। पुस्तक का नाम — ‘‘ इक्कीसवीं सदी का गंगावतरण ’’ , यह पुस्तक १९८८-९० तक की समयावधि में लिखी गई ‘क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला’’ की एक पुस्तक है, जिसके एक अध्याय ‘‘ प्रामाणिक तंत्र का विकास ’’ को यहाँ समझने का प्रयास किया जाना है। पुस्तक के लेखक — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) श्रोता वर्ग — सामान्य नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखक’’ शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला’’ के बारे में ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ ने ‘‘वन्दनीया माताजी’’ से वसन्त पंचमी १९९० को कहा था — ‘‘मेरा ज्ञान शरीर ही जिन्दा रहेगा। ज्ञान शरीर का प्रकाश जन-जन के बीच में पहुँचना ही चाहिए और आप सबसे कहियेगा — सब बच्चों से कहियेगा कि मेरे ज्ञान शरीर को मेरे ‘क्रान्तिधर्मी साहित्य’ के रूप में जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करें।’’ ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। स्रोत — सभी स्रोत पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) द्वारा १९८८-९० तक की समयावधि में लिखी ‘‘क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला’’ से प्रश्नों के उत्तर रूप में संकलित किए गए हैं। श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखक’’ शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। पुस्तक का नाम — ‘‘ मैं क्या हूँ? ’’ पुस्तक के लेखक — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखक’’ शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ पुस्तक का नाम — ‘‘ उपासना के दो चरण — जप व ध्यान ’’ है, जिसके एक अध्याय ‘‘ ध्यान धारणा की दिव्यशक्ति ’’ को यहाँ समझने का प्रयास किया जाना है। पुस्तक के लेखक — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखक’’ शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ पुस्तक का नाम — ‘‘ चेतना की शिखर यात्रा भाग-२ ’’ है, जिसका एक अध्याय ‘‘ प्रतीक्षा में खड़ा भविष्य ’’ यहाँ प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) के जीवनी के रूप में उनके शिष्यों द्वारा लिखी गयी है। श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखक’’ शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ उद्बोधन का नाम — ‘‘ युग के देवता की अपील अनसुनी न करें ’’ उद्बोधनकर्ता — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय "उद्बोधनकर्ता" शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ उद्बोधन का नाम — ‘‘ ज्ञान और पराक्रम का पथ अध्यात्म ’’ , यह उद्बोधन अखण्ड ज्योति पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। उद्बोधनकर्ता — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय "उद्बोधनकर्ता" शब्द की जगह ‘‘पूज्य गुरुदेव’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (गायत्री परिवार के संस्थापक) जी द्वारा लिखित पुस्तकों में से "जीवन की सभी समस्याओं का अचूक समाधान" के रूप में जनसामान्य की सहायता और मार्गदर्शन के लिए प्रस्तुत संकलन किया गया है। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में सामान्य भारतीय नागरिकों के लिए प्रस्तुत करें। यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ संस्कार परम्परा की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 1 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ पुंसवन संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 2 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ नामकरण संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 3 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ अन्नप्राशन संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 4 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ मुण्डन संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 5 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ विद्यारम्भ संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 6 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ यज्ञोपवीत और दीक्षा संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 7 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ वानप्रस्थ संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 8 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ जन्मदिवसोत्सव संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 9 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ विवाहदिवसोत्सव संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 10 यह स्रोत विभिन्न संस्कारों के बारे में हैं। आप दोनो स्रोतों को ध्यान में रखते हुए ‘‘ अन्त्येष्ठि व मरणोत्तर संस्कार की मानव जीवन में महत्ता ’’ को विवेचित करें। संस्कार: आध्यात्मिक जीवनशैली - 11 पुस्तक का नाम — ‘‘ भारतीय संस्कृति में नारी का उच्चस्थान ’’ पुस्तक की लेखिका — वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा (गायत्री परिवार की संस्थापिका) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखिका’’ शब्द की जगह ‘‘वन्दनीया माताजी’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ पुस्तक का नाम — ‘‘ परमात्मा की सर्वोत्कृष्ट कृति नारी ’’ , जिसके एक अध्याय ‘‘ नारी की सच्ची शृंगारिकता ’’ को यहाँ समझने का प्रयास किया जाना है। पुस्तक की लेखिका — वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा (गायत्री परिवार की संस्थापिका) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखिका’’ शब्द की जगह ‘‘वन्दनीया माताजी’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ उद्बोधन का नाम — ‘‘ बलिहारी गुरु आपकी जिन गोविंद दियो मिलाय ’’ , यह उद्बोधन अखण्ड ज्योति पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। उद्बोधनकर्त्री — वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा (गायत्री परिवार की संस्थापिका) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘उद्बोधनकर्त्री’’ शब्द की जगह ‘‘वन्दनीया माताजी’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ पुस्तक का नाम — ‘‘ बच्चों को उत्तराधिकार में धन नहीं, गुण दें ’’ है, जिसके एक अध्याय ‘‘ सभ्यता व संस्कृति ’’ को यहाँ समझने का प्रयास किया जाना है। पुस्तक की लेखिका — शैलबाला पण्ड्या (सुपुत्री वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा एवं पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य) श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय ‘‘लेखिका’’ शब्द की जगह ‘‘श्रद्धेया जीजी’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। अन्त में निम्न पंक्ति अवश्य कहें — ‘‘अधिक जानकारी के लिए कृपया गायत्री परिवार की वेबसाइट www.awgp.org और यूट्यूब चैनल shantikunjvideo पर अवश्य जाएँ अथवा गायत्री परिवार के किसी नजदीकी केन्द्र से सम्पर्क करें। सादर, धन्यवाद। ’’ पुस्तक का नाम — ‘‘ महाशक्ति की लोकयात्रा ’’ . यह पुस्तक वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा (गायत्री परिवार की संस्थापिका) जी के दिव्य जीवन की अमृत कथा है। ब्रह्मवर्चस द्वारा सम्पादित इस पुस्तक में जो कुछ लिखा गया है वह दृश्य सत्यों का भावपूर्ण संकलन है। पुस्तक के लेखक — डॉ. प्रणव पण्ड्या श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय माता भगवती देवी शर्मा जी को ‘‘वन्दनीया माताजी’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें। पुस्तक का नाम — ‘‘ महाशक्ति की लोकयात्रा ’’ . यह पुस्तक वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा (गायत्री परिवार की संस्थापिका) जी के दिव्य जीवन की अमृत कथा है। ब्रह्मवर्चस द्वारा सम्पादित इस पुस्तक में जो कुछ लिखा गया है वह दृश्य सत्यों का भावपूर्ण संकलन है , जिसके एक अध्याय ‘‘ शिष्यों की करुण याचना—क्षमा-प्रार्थना ’’ को यहाँ समझने का प्रयास किया जाना है। पुस्तक के लेखक — डॉ. प्रणव पण्ड्या श्रोता वर्ग — सामान्य भारतीय नागरिक विशेष — कृपया सम्बोधन करते समय माता भगवती देवी शर्मा जी को ‘‘वन्दनीया माताजी’’ कहें। ‘‘औरत’’ शब्द की जगह सदा ‘‘नारी या स्त्री’’ शब्द, मर्द शब्द की जगह सदा ‘‘पुरुष’’ शब्द एवं किताब शब्द की जगह सदा ‘‘पुस्तक’’ शब्द का ही प्रयोग करें। कृपया इसे अधिकाधिक समय विस्तार में प्रस्तुत करें।